Hemant kakare#हेमंत करकरे
जब हेमंत करकरे मालेगाँव बम धमाके की जाँच कर रहे थे तो उस दरमियान उन्हें तीन लैपटॉप मिला और करकरे साहब ने जब लैपटॉप खोल कर देखा तो उसमें वो तीन लैपटॉप इस सो कॉल्ड हिंदू राष्ट्र का ब्लू प्रिंट था।
दरअसल अभिनव भारत नाम का संगठन देश के प्रमुख शहरों में जाके वहाँ के कट्टर ब्रह्मणवादियों की मीटिंग करता था, बम धमाका करना और अपने एजेंडे को लागू करना इनका मुख्य उद्देश रहता था। जो भी मीटिंग करते थे उसकी रिकॉर्डिंग लैपटॉप में रखते थे।
हेमंत करकरे ने जब लैपटॉप खोल कर देखा तो उसमें वही चौबीस मीटिंग की रिकॉर्डिंग पड़ी थी। इस रिकॉर्डिंग में देश के लगभग सभी संविधान विरोधी चेहरे जो उद्योग घराने/मीडिया/विधायिका से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में हैं वे सब शामिल थे। मीटिंग में इन सबके ख़ूँख़ार चेहरे और इनके खतरनाक एजेंडे को देखकर करकरे साहब हैरान हो गए।
हेमंत करकरे इस रिकॉर्डिंग की एक क्लिप देखते, फिर जिन लोगों के चेहरे इसमें शामिल थे उनको बुला के पूछताछ करते। लैपटॉप में मौजूद चौबीस क्लिप में से हेमंत करकरे साहब तीन ही क्लिप देख पाए थे और इतने में ही पूरे देश में हाहाकार मच गया था, मक्का मस्जिद ब्लास्ट, अजमेर धमाका से लेकर मालेगांव धमाका तक की तमाम परतें खुलनी शुरू हो चुकी थीं, कई सफ़ेदपोश चेहरे बेनकाब होना शुरू हो चुके थे। आतंक का असल खेल खेलने वाले भेड़िए बाहर आ रहे थे।
उसमें एक मीटिंग फ़रीदाबाद में हुई थी जिसका कनेक्शन सीधा मालेगाँव धमाके से था जिसको करकरे साहब ने मालेगांव धमाके की चार्जशीट के साथ जोड़ दिया था जो कि कोर्ट में आज भी मौजूद था।
उस एक मीटिंग में कर्नल पुरोहित बोलते हैं कि हम संविधान से लड़ाई लड़ेंगे, हमें इस राष्ट्र से लड़ना है क्योंकि ये राष्ट्र हमारा नहीं है। इस संविधान को हमें ख़त्म करना है। मीटिंग में कई ऑफ़िसर खुला युद्ध एवं हिंदुत्व के एजेंडे को लागू करने की बात कर रहे थे।
ख़ैर करकरे साहब उन चौबीस मीटिंग में से सिर्फ़ तीन मीटिंग के बारे में देख पाए थे उसी बीच मुंबई टेरर अटैक हो गया।
और करकरे साहब को भी उसी बीच एक साज़िश के तहत शहीद कर दिया गया। करकरे साहब की हत्या के बाद ये चैप्टर हमेशा के लिए बंद हो गया।
करकरे साहब की हत्या एक ख़तरनाक साज़िश की तरफ़ इशारा करती थी, लेकिन इसपर निष्पक्ष जाँच नहीं हुआ।
कांग्रेस पार्टी के ए.आर. अंतुले ने इस हत्या पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया था तो दिग्विजय सिंह इस मामले में पूरा चिट्ठा खोल दिया था लेकिन यही कांग्रेस इस मामले की जाँच नहीं कराई।
इस मामले में पटना के पूर्व विधायक राधाकांत यादव भी कुछ वर्ष पूर्व हाईकोर्ट में याचिका दाख़िल की थी कि हेमंत करकरे की हत्या का दोबारा जाँच किया जाए पर आजतक इसपर कोई अमल नहीं हुआ।
(हेमंत करकरे की हत्या पर मुंबई पुलिस के पूर्व आईजी एस.एम. मुशरिफ ने “हू किल्ड करकरे” नामक किताब लिखकर सीधा आरोप लगाए हैं पर अफ़सोस ये सब चर्चा का विषय नहीं है।)
दरअसल अभिनव भारत नाम का संगठन देश के प्रमुख शहरों में जाके वहाँ के कट्टर ब्रह्मणवादियों की मीटिंग करता था, बम धमाका करना और अपने एजेंडे को लागू करना इनका मुख्य उद्देश रहता था। जो भी मीटिंग करते थे उसकी रिकॉर्डिंग लैपटॉप में रखते थे।
हेमंत करकरे ने जब लैपटॉप खोल कर देखा तो उसमें वही चौबीस मीटिंग की रिकॉर्डिंग पड़ी थी। इस रिकॉर्डिंग में देश के लगभग सभी संविधान विरोधी चेहरे जो उद्योग घराने/मीडिया/विधायिका से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में हैं वे सब शामिल थे। मीटिंग में इन सबके ख़ूँख़ार चेहरे और इनके खतरनाक एजेंडे को देखकर करकरे साहब हैरान हो गए।
हेमंत करकरे इस रिकॉर्डिंग की एक क्लिप देखते, फिर जिन लोगों के चेहरे इसमें शामिल थे उनको बुला के पूछताछ करते। लैपटॉप में मौजूद चौबीस क्लिप में से हेमंत करकरे साहब तीन ही क्लिप देख पाए थे और इतने में ही पूरे देश में हाहाकार मच गया था, मक्का मस्जिद ब्लास्ट, अजमेर धमाका से लेकर मालेगांव धमाका तक की तमाम परतें खुलनी शुरू हो चुकी थीं, कई सफ़ेदपोश चेहरे बेनकाब होना शुरू हो चुके थे। आतंक का असल खेल खेलने वाले भेड़िए बाहर आ रहे थे।
उसमें एक मीटिंग फ़रीदाबाद में हुई थी जिसका कनेक्शन सीधा मालेगाँव धमाके से था जिसको करकरे साहब ने मालेगांव धमाके की चार्जशीट के साथ जोड़ दिया था जो कि कोर्ट में आज भी मौजूद था।
उस एक मीटिंग में कर्नल पुरोहित बोलते हैं कि हम संविधान से लड़ाई लड़ेंगे, हमें इस राष्ट्र से लड़ना है क्योंकि ये राष्ट्र हमारा नहीं है। इस संविधान को हमें ख़त्म करना है। मीटिंग में कई ऑफ़िसर खुला युद्ध एवं हिंदुत्व के एजेंडे को लागू करने की बात कर रहे थे।
ख़ैर करकरे साहब उन चौबीस मीटिंग में से सिर्फ़ तीन मीटिंग के बारे में देख पाए थे उसी बीच मुंबई टेरर अटैक हो गया।
और करकरे साहब को भी उसी बीच एक साज़िश के तहत शहीद कर दिया गया। करकरे साहब की हत्या के बाद ये चैप्टर हमेशा के लिए बंद हो गया।
करकरे साहब की हत्या एक ख़तरनाक साज़िश की तरफ़ इशारा करती थी, लेकिन इसपर निष्पक्ष जाँच नहीं हुआ।
कांग्रेस पार्टी के ए.आर. अंतुले ने इस हत्या पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया था तो दिग्विजय सिंह इस मामले में पूरा चिट्ठा खोल दिया था लेकिन यही कांग्रेस इस मामले की जाँच नहीं कराई।
इस मामले में पटना के पूर्व विधायक राधाकांत यादव भी कुछ वर्ष पूर्व हाईकोर्ट में याचिका दाख़िल की थी कि हेमंत करकरे की हत्या का दोबारा जाँच किया जाए पर आजतक इसपर कोई अमल नहीं हुआ।
(हेमंत करकरे की हत्या पर मुंबई पुलिस के पूर्व आईजी एस.एम. मुशरिफ ने “हू किल्ड करकरे” नामक किताब लिखकर सीधा आरोप लगाए हैं पर अफ़सोस ये सब चर्चा का विषय नहीं है।)

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